Wednesday, August 5, 2020

जय सियाराम

न तो नाकूस से है 
और न एक शाम से है,
हिन्द की गर्मी-ए-हंगामा 
तेरे नाम से है,
नक़्श-ए-तहज़ीब-ए-हुनूद 
अब भी नुमायाँ है अगर,
तो वो 
सीता से है,
लक्ष्मण से है 
और 
राम से है”